कौनसी जड़ गले में पहने अगर ग्रह निर्बल हो रहा हो तो। निर्बल, मित्र , नीच, शत्रु राशि में ग्रह हो तो कौनसी जड़ पहननी चाहिए?

कौनसी जड़ गले में पहने अगर ग्रह निर्बल हो रहा हो तो

नमष्कार बंधुओ, आज की पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि  विभिन्न ग्रह अगर  बलपूर्वक हो , या शत्रु राशि मे हो या फिर मित्र राशि में हो या नीच राशि में हो तो कौनसी जड़ पहननी चाहिए । आज की पोस्ट उन पाठकों के लिए हैं जिनको ज्योतिष का ज्ञान है और जो अपनी कुंडली के निर्बल ,कुपित, पीड़ित, हानिकारक ,दोषकारक,  रोगकारक ग्रहों को तथा बली, शुभ , लाभदायक या योगकारक ग्रहो को जानते हैं।
जिन पाठकों को अपनी कुंडली का ज्ञान नहीं है व ज्योतिष का ज्ञान नहीं है वह किसी योग्य ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें ।

सूर्य:

सूर्य निर्बल हो तो बेल की जड़ गले में पहने। शत्रु राशि में हो तो श्वेतार्क की जड़ गले में पहने । नीच का हो तो लाल कनेर की जड़ गले में पहने। मित्र राशि में हो तो अनार की जड़ पहने । रविवार की अमावस्या को गुड बहते पानी में बहाना नीच के सूर्य का उत्तम उपाय हैं। 

चंद्र: 

चंद्र निर्बल हो तो खिरनी की जड़ पहने ।वशत्रु राशि में हो या पाप प्रभाव में हो तो बरगद की जड़ पहने । नीच राशि में हो तो गुलर की जड़ या अनंत मूल की जड़ पहने । मित्र राशि में हो तो तांबे की ठोस गोली पहने। सोमवती अमावस्या को लीची या फिर पेठा नदी में बहाना भी नीच के चंद्र का उत्तम उपाय है।

मंगल:

मंगल निर्बल हो तो अनंत मूल की जड़ पहने। 
शत्रु राशि में हो तो शमी की जड़ पहने । नीच राशि में हो तो केले के पेड़ की जड़ पहने । मित्र राशि में हो तो गुलर की जड़ पहने। भौमवती अमावस्या  को नदी में गुड़ की रेवड़ी बहाना नीच के मंगल का उत्तम उपाय है।

बुध:

बुद्ध निर्बल हो तो विधारा की जड़ पहने । शत्रु राशि में हो तो तांबे का सिक्का गले में पहने । नीच राशि का हो तो पुनर्नवा की जड़ या पलाश की जड़ पहने । मित्र राशि का हो तो आवंले की जड़ पहने।  बुधवासरी अमावस को मूंग बहते पानी में बहना नीचे के बुद्ध का उपाय है।

गुरु :

गुरु निर्बल हो तो पुनर्नवा की जड़  गले में पहने। शत्रु राशि हो तो पपीते की जड़ में पहने। नीच राशि हो तो गुलर की जड़ या बरगद की जड़ पहने । मित्र राशि हो तो हल्दी की गांठ या केले की जड़ पहने। नदी में हल्दी या चने की दाल गुरुवासरी अमावस्या को बहाना भी नीच के गुरु के लिए अच्छा उपाय है।

शुक्र: 

शुक्र निर्बल हो तो शरपोंखा की जड़ गले में पहने।  शत्रु राशि में हो तो पलाश की जड़ या फिर चंदन का पेंडल पहने । नीच राशि में हो तो आंवले की जड़ पहने।  मित्र राशि में हो तो स्फटिक या फिर रुद्राक्ष की माला पहने। शुक्रवार की अमावस्या को नदी में चावल /दही बहाना भी नीच के शुक्र का उपाय है।

शनि:

शनि निर्बल हो तो बिच्छू घास की जड़ पहने । शत्रु राशि में हो तो पीपल की जड़ पहने ।नीच  का हो तो अपामार्ग की जड़ पहने । मित्र राशि में हो तो जामुन / पीपल की छाल काले धागे में पहने । शनिवार की अमावस को तेल आक की जड़ में डालना अथवा शराब नाली में बहाना  नीच के शनि  का अच्छा उपाय है।

राहु: 

राहु निर्बल या शत्रु राशि में हो तो सर्पगंध की जड़ पहने। नीच का हो तो सफेद चंदन का लॉकेट पहने तथा चांदी का चकोर टुकड़ा साथ रखें। मित्र राशि में हो तो धतूरे की जड़ पहने या धतूरे बीज या सफेदे का पत्ता साथ में रखें। शनिवार को सिक्का या तंबाकू नाली में बहाना या पीपल की लकड़ी जलाकर उसकी कोयला नाली में बहना नीच राहु का उपाय हैं।

केतु:

केतु निर्बल हो तो अश्वगंधा की जड़ पहने ।शत्रु राशि में हो तो भी अश्वगंधा की ही जड़ पहने । नीच का हो तो पपीते के बीज कपड़े के ताबीज में पहने या निर्गुंडी/ पलाश की जड़ पहने । मित्र राशि में हो तो पीले लाल कनेर की जड़ पहने । काले सफेद तिलों को समान मात्रा में बहते पानी में बहाना  या मछलियों को सतनाजे की गोलियां डालना नीच के केतु का उपाय है।